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“शरीर में पानी की कमी यानी किडनी की सेहत खराब”

विश्व किडनी दिवस पर विशेष 

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वृक्क कल्प क्रानिक किडनी डिसीजेज में अत्यन्त लाभकारी – डॉ जी एस तोमर 

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किडनी के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सबसे पहले साल 2006 में 66 देशों ने एक साथ मिलकर विश्व किडनी दिवस मनाया था। जिसके बाद दो सालों के भीतर ही 66 देशों की यह संख्या बढ़कर 88 हो गई। बता दें, वर्ल्ड किडनी डे इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशन की एक संयुक्त पहल है । ये खास दिन हर साल मार्च महीने के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। यानी इस साल, 14 मार्च को विश्व किडनी दिवस मनाया जा रहा है । किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो रक्त से विषाक्त पदार्थों को हटाने और इन्हें छानकर मूत्र के रास्ते बाहर निकालने का काम करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो मानव शरीर में मौजूद दोनों किडनी (वृक्क /गुर्दे) मिलकर हर 24 घंटे में लगभग 200 लीटर तरल पदार्थ छानती हैं। वहीं, अगर ये सही ढंग से काम करना बंद कर दें, तो शरीर के निर्विषीकरण (डिटॉक्सीफिकेसन) की प्रक्रिया बाधित हो जाती है और कई बीमारियां व्यक्ति को घेर सकती हैं। इसी कड़ी में शरीर के इस जरूरी अंग के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल विश्व किडनी दिवस (वर्ल्ड किडनी डे) मनाया जाता है।

इस दिन 2024 अभियान का विषय ‘ सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य ‘(किडनी हैल्थ फ़ॉर ऑल) है। यह विषय क्रोनिक किडनी रोग के बढ़ते बोझ और विभिन्न स्तरों पर इन चुनौतियों से निपटने के लिए अधिकतम किडनी देखभाल प्राप्त करने पर केंद्रित है।

यहाँ कुछ आसान तरीक़े बताए जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने गुर्दों की सेहत का ख्याल रख सकते हैं ।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की जीवनशैली और खाने-पीने की आदतें बिगड़ गई हैं। पोषक तत्वों से भरपूर आहार न लेने, पर्याप्त पानी न पीने और व्यायाम की कमी के चलते बॉडी में विषाक्त पदार्थ बढ़ने लगते हैं। चूँकि हमारी किडनी रक्त से विषाक्त पदार्थों को हटाने और इन्हें छानकर मूत्र के रास्ते बाहर निकालने का काम करती हैं। हालांकि, अधिक मात्रा में शरीर में जमा टॉक्सिन किडनी का काम प्रभावित करने लगते हैं, जिससे समय के साथ गुर्दों से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में किडनी को स्वस्थ रखने के लिए एक्टिव लाइफस्टाइल और खानपान का सही होना बेहद जरूरी है।

हाई ब्लड शुगर का खराब असर भी आपकी किडनी पर पड़ता है, ऐसे में मधुमेह रोगियों के लिए अपनी किडनी का ख्याल रखना और अधिक जरूरी हो जाता है।

शरीर में पानी की कमी होने पर किडनी की सेहत पर खराब असर पड़ता है। पानी की कमी डिटॉक्सीफिकेसन की प्रकिया में बाधा पैदा कर सकती है। ऐसे में बेहतर किडनी स्वास्थ्य के लिए सही मात्रा में पानी पिएं।

इन सब से अलग धूम्रपान, शराब और तंबाकू का सेवन करने से परहेज करें। इस तरह की आदतें आपके फेफड़ों के साथ-साथ गुर्दों की सेहत पर भी खराब असर डालती हैं।

आयुर्वेद में पाँच विशेष पौधों (कुश, काश, सर, दर्भ एवं इक्षु) की जड़ों से तैयार तृणपंचमूल नामक औषधि न केवल किडनी रोगों की चिकित्सा में बहुत कारगर है अपितु डायबिटीज़ एवं हाई ब्लड प्रेशर जैसे रोगियों द्वारा प्रयोग किए जाने पर उपद्रव स्वरूप होने वाले किडनी रोग से बचा जा सकता है। इसके अलावा गोखरू एवं पुनर्नवा भी ऐसी वनौषधियाँ हैं जो किडनी स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं । इन सभी वनौषधियों के योग से वृक्क कल्प नामक औषधि तैयार की गई है, जो 180 रोगियों पर हुए चिकित्सीय अध्ययन में मिले परिणाम के अनुसार अत्यन्त कारगर है ।

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