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“Leprosy is curable, discrimination against leprosy patients is reprehensible”: Dr KG Singh

 Shanti chaudhary

कुष्ठ रोग साध्य है, कुष्ठ रोगियों से भेदभाव सही नहीं- डॉ के जी सिंह

विश्व आयुर्वेद मिशन द्वारा विश्व कुष्ठ दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य परिचर्चा आयोजित की गई।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पूर्व त्वचा रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ०) के जी सिंह ने कहा कि कुष्ठ रोग, उन बीमारियों में से एक है, जिसमें रोगी को सिर्फ रोग से नहीं इसके कारण समाज में फैले स्टिग्मा से भी मुकाबला करना होता है।कुष्ठ रोगियों का हौंसला और बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने, कुष्ठ से संबंधित कलंक और भेदभाव को समाप्त करने के लिए ‘विश्व कुष्ठ रोग’ दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार इस साल “यूनाइटेड फॉर डिग्निटी” थीम के साथ कुष्ठ रोग दिवस मनाया जा रहा है, जिसके माध्यम से कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों की गरिमा का सम्मान किया जा सके।डॉ सिंह ने बताया कि कुष्ठ हाथों के स्पर्श से नही फैलता बल्कि छीकने खांसने से ड्रॉपलेट के द्वारा इसका संक्रमण फैलता है।कुष्ठ यदि छूने से फैलता तो कुष्ठ रोगियों का इलाज करने वाले ज्यादातर चिकित्सक भी इस बीमारी से संक्रमित होते, पर ऐसा नही है।मरीजों के संपर्क में आने से इस बीमारी के प्रति शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है।

विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रो (डॉ०) जी एस तोमर ने कहा कि कुष्ठ रोग या हेन्सन रोग एक संक्रामक स्थिति है, जिसके कारण त्वचा, नसें और आंख-नाक की परत प्रभावित हो सकती है। कुष्ठ रोग एक धीरे-धीरे बढ़ने वाले जीवाणु के कारण होता है जिसे माइकोबैक्टीरियम लेप्री कहा जाता है। इस संक्रमण के शिकार लोगों को हाथों और पैरों में सुन्नता और कमजोरी, संवेदना की कमी और त्वचा के हल्के रंग या लाल रंग के पैच दिखने की समस्या हो सकती है।
डॉ तोमर ने कहा कि कुष्ठ रोग के संबंध में फैली भ्रांतियों को दूर कर समाज मे संदेश देना होगा कि यह साध्य बीमारी है।कुष्ठ रोगियों के साथ समानता का व्यवहार करें।

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की पूर्व शोध अधिकारी डॉ शांति चौधरी ने कहा कि समाज मे कुष्ठ रोगियों के प्रति फैली गलत धारणा को समाप्त करना होगा।आज समाज मे कुष्ठ रोगियों का तिरस्कार किया जाता है जिसकी वजह से अपने परिवार से दूर कुष्ठ आश्रम में रहने के लिए मजबूर हैं।हम इनके भोजन, दवा के साथ साथ मानवीय संवेदना भी प्रदान करना होगा।इनके लिए कुटीर उद्योग की शुरुआत करनी चाहिए जो इनके आय का साधन होगा साथ ही व्यस्तता भी रहेगी।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली से डॉ रमाकांत यादव ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का प्रयास सराहनीय है जो इस बार विश्व कुष्ठ दिवस का थीम कुष्ठ रोगियों के प्रति उपेक्षा को समाप्त करने के लिए है।उन्होंने सत्वावजय चिकित्सा के द्वारा कुष्ठ मरीजों के मेन्टल स्टेटस को सामान्य रखा जा सकता है।इंटीग्रेटेड हेल्थ को बढ़ावा देते हुए कहा कि एलोपैथिक दवाओं के साथ साथ आयुर्वेदिक दवाओं के प्रयोग करने से मरीजों को अधिक लाभ मिल सकता है।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ अवनीश पाण्डेय ने कहा कि कुष्ठ रोग जागरूकता की कमी और कुष्ठ रोग से जुड़ी सामाजिक वर्जनाएं भी स्थिति को खराब कर रही हैं। हमें बस इतना करना है कि कुष्ठ रोग के बारे में मूल बातें समझें और इन सामाजिक वर्जनाओं से छुटकारा पाएं।यदि रोगी प्रारंभिक अवस्था में आते हैं और दिशानिर्देशों के अनुसार पूरा इलाज करते है तब कुष्ठ रोग का इलाज किया जा सकता है और विकलांगता को रोका जा सकता है।


Leprosy is curable, discrimination against leprosy patients is reprehensible-
Dr KG Singh

Health discussion was organized by Vishwa Ayurveda Mission on the occasion of World Leprosy Day.
Professor (Dr.) KG Singh, former Head of the Department of Dermatology, Motilal Nehru Medical College, Prayagraj said that leprosy is one of those diseases, in which the patient has to deal not only with the disease but also with the stigma spread in the society. World Leprosy Day is celebrated to encourage patients and raise awareness about the disease, eliminate stigma and discrimination related to leprosy. According to the World Health Organization (WHO), this year Leprosy Day is being celebrated with the theme “United for Dignity”, through which the dignity of people suffering from leprosy can be respected. He said that it is not spread by touch. Its infection spreads through droplets by sneezing and cough. If leprosy spread through touch, then most of the doctors treating leprosy patients would also be infected with this disease, but it is not so.

President of Vishwa Ayurveda Mission Prof (Dr.) GS Tomar said that leprosy or Hansen’s disease is a contagious condition, due to which the skin, nerves and lining of the eyes and nose can be affected. Leprosy is caused by a slowly growing bacterium called Mycobacterium leprae. People with this infection may experience numbness and weakness in the hands and feet, loss of sensation, and light-colored or red patches of skin.
Dr. Tomar said that by removing the misconceptions about leprosy, a message has to be given in the society that it is a curable disease.

Dr. Shanti Chaudhary, former Research officer of Motilal Nehru Medical College, said that the misconception about leprosy patients in the society has to be ended. We have to provide them food, medicine as well as good behaviour. Treat leprosy patients equally.

Dr. Ramakant Yadav from All India Institute of Ayurveda, New Delhi told that the effort of World Health Organization is commendable, which this time the theme of World Leprosy Day is to end the neglect of leprosy patients. He discussed abou the Satvavajay therapy for mental status of Leprosy patient. Promoting integrated health, he said that patients can get more benefits by using Ayurvedic medicines along with allopathic medicines.

Ayurvedic Medical Officer, Dr. Awanish Pandey said that the lack of leprosy awareness and social stigma related to leprosy are also worsening the situation. If patients come in early stage and complete treatment as per guidelines then leprosy can be treated.

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