
विश्व रंगमंच दिवस
27 मार्च 2021
आजकल हर दिन को किसी न किसी के नाम पर मनाए जाने की प्रथा चल पड़ी है। जैसे -रोज डे, चॉकलेट डे, किस डे, हग डे, थैंक्सगिविंग डे इत्यादि। कुछ बहुत मशहूर हो गए जैसे वैलेंटाइन डे, युवाओं के प्रेम प्रसंग का दिन। लेकिन कभी हम इसके महत्व को जानने की कोशिश नहीं करते।
27 मार्च विश्व रंगमंच दिवस है लगभग सभी रंगकर्मी इस दिन को मनाते हैं, कोई नाट्य प्रस्तुति करके, नाटक का वाचन करके या और कोई रंगमंचीय गतिविधि करके। बहुत अच्छी बात है। पहले तो यह जानना आवश्यक है यह कब आरंभ हुआ? अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच दिवस की स्थापना 27 मार्च 1961 को फ्रांस में ‘नेशनल थीएट्रिकल इंस्टीट्यूट’ द्वारा की गई तब से यह परंपरा चल रही है।
इसका पहला संदेश एक साल बाद जीन कोकट्यू द्वारा प्रसारित किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य रंगमंच की गतिविधि को बढ़ावा देना।
लोगों को रंगमंच के सभी रूपों के महत्व के प्रति अवगत कराना।
रंगमंच के आनंद को साझा करना।
रंगमंच किस प्रकार सामाजिक विकास में सहायक हो सकता है इस बात को समझना।
रंगमंच सभी कलाओं का समूह है इसलिए कोई व्यक्ति किसी कला के प्रेमी हो सबके लिए कुछ ना कुछ इसमें होता है।
कुछ लोगों ने रंगमंच को प्रतिरोध के हथियार के रूप में देखा और वही तक सीमित कर दिया। कोई भी कला हो वह अभिव्यक्ति का माध्यम है प्रतिरोध का स्वर भी उन्हीं में से एक है परंतु केवल उसे प्रतिरोध तक सीमित कर देना किसी भी कला को संकुचित कर देता है। कला आनंद प्राप्ति का भी साधन है इसी लिए नवरस की संकल्पना है। जीवन के सभी रस कला में समाहित है और रंगमंच में तो सभी कलाओं का परिपाक होता है इसलिए यह सर्वश्रेष्ठ है और इसीलिए भरतमुनि के नाट्य शास्त्र को पंचम वेद कहा गया है। इसी में एक श्लोक है-
न तत्तज्ञानं न तच्छिल्पं न सा विद्या न सा कला ।
नअसौ योगो न तत्कर्मंनाट्येऽस्मिन् यन्न दृश्यते ।।
कोई ज्ञान, कोई शिल्प, कोई विद्या, कोई कला, कोई योग, कोई कर्म ऐसा नहीं है, जो नाट्य में दिखाई न देता हो।
हमें इस कला के महत्व को समझ कर इसके प्रचार-प्रसार का पूरा प्रयास करना चाहिए क्योंकि यह कला सामाजिक समरसता और समृद्धि का एक मुख्य साधन बन सकती है।
अरुण शेखर
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