
विपक्ष पर योगी की प्रहार
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
“किसानों के नाम पर पंजाब से शुरू हुई राजनीति को अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी अवसर के रूप में लिया है। इन सभी ने इस मुद्दे पर अपनी सक्रियता बढा दी है।”
योगी आदित्यनाथ ने पत्रकार वार्ता में इन विपक्षी पार्टियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केंद्र व प्रदेश की वर्तमान सरकार के किसान कल्याण संबन्धी कार्यो का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष को आइना भी दिखाया। कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए किसानों की भलाई नहीं कर सके,वह आज अपने को किसान हितैषी बता रहे है।
गुमराह नहीं होंगे किसान
योगी ने विश्वास व्यक्त किया कि किसान विपक्ष के बहकावे में नहीं आएंगे। उन्होंने विपक्षी पार्टियों की सरकारें भी देखी है। उनकी प्राथमिकता में किसान कल्याण नहीं था। आज वही लोग किसानों को गुमराह कर रहे है। यह लोग भोले भाले किसानों को गुमराह कर उनके कंधे पर बंदूक रखकर देश का माहौल खराब करना चाहते हैं। जबकि इन्ही पार्टियों ने संसद की स्थायी समिति में कृषि सुधारों का समर्थन किया था।
याद करें अपना पुराना रुख
यूपीए-2 की सरकार में कृषि मंत्री रहे शरद पवार ने राज्यों के मुख्यममंत्रियों को पत्र लिखा था। जिसमें एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमिटी एक्ट में बदलाव की जरूरत बताते हुए देश में एक मॉडल एक्ट की वकालत की थी। कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों के चुनावी घोषणा पत्र में एपीएमसी एक्ट में संशोधन की बात प्रमुखता से कही गई है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं सहित टीएमसी और अकाली दल और कांग्रेस के नेताओं ने कृषि संबंधी संसद की स्थायी समिति में चर्चा में एपीएमसी एक्ट में संशोधन की आवश्यकता का समर्थन किया था। इन सभी दलों ने समय-समय पर वन नेशन वन मंडी को देश के लिए उपयोगी बताया है।

विपक्ष का दोहरा चरित्र
लेकिन आज जब केंद्र की एनडीए सरकार किसानों के उत्तम भविष्य को सुनिश्चित करते हुए यही कानून लाई है तो इन्हीं दलों को पीड़ा हो रही है। योगी ने विपक्षी दलों के इस रवैये को दोहरा चरित्र करार देते हुए देश से माफी मांगने को कहा है।
अभूतपूर्व किसान कल्याण कार्य
तीन साल के दौरान योगी सरकार एक लाख बारह हजार करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना किसानों का भुगतान कर चुकी है। अब तक किसानों से 277.29 लाख क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। यह खरीद पिछले वर्ष से डेढ़ गुना से भी अधिक है, पिछली सरकार की तुलना में योगी सरकार ने छह गुना अधिक धान की खरीद सुनिश्चित की है। प्रदेश में 102 मक्का क्रय केंद्रों से अब तक किसानों से 3 लाख 52 हजार क्विंटल मक्का की खरीद की जा चुकी है। धान और मक्का की खरीद का भुगतान बहत्तर घंटे के अन्दर सुनिश्चित किया जा रहा है। पिछले तीन सालों में गन्ना किसानों को एक लाख दस हजार करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। योगी सरकार ने पिछले दिनों मंडी शुल्क घटाकर एक फीसदी कर दिया है। योगी सरकार ने अपने पहले ही कैबिनेट में चुनावी संकल्पपत्र के अनुसार छियासी लाख लघु सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ कर सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता जता दी थी। इसके लिए सरकार ने अपने संसाधनों से छत्तीस हजार करोड़ रुपये खर्च किए।
चार करोड़ मृदा कार्ड
सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि खेत को उसकी जरूरत के अनुसार खाद और सूक्ष्म पोषक तत्व मिले इसके लिए सरकार ने मिट्टी की जांच को मुहिम के तौर पर लिया। अब तक चार करोड़ से अधिक किसानों के पास मृदा कार्ड हैं। कृषि यंत्रीकरण के जरिए श्रम पर होने वाली लागत घटे इसके लिए सरकार कृषि यंत्रों पर भारी अनुदान दे रही है। यही नहीं, मौजूदा वित्तीय में कृषि मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए सरकार का लक्ष्य 22000 से अधिक किसान समूहों को 40 हजार से अधिक उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध कराएगी। यंत्रीकरण के जरिए कम लागत में अधिक उपज मिलने से किसानों की आय बढ़ जाएगी।

द मिलियन फार्मर्स स्कूल
कृषि शोध संस्थानों से किसानों को इनका लाभ तब होगा। सरकार ने अपने इस तंत्र के जरिए किसानों तक पहुचने के लिए द मिलियन फार्मर्स स्कूल के नाम से अभिनव प्रयोग शुरु किया। दोनों फसली सीजन के शुरुआत में होने वाले अपने तरह की इस अभिनव योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा चुका है। प्रसार के इस तंत्र को सरकार और मजबूत कर रही है।
विज्ञान केंद्र
बीस कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना की जा रही है। अधिकांश स्थापना के बाद संचलन में हैं। बाकी पर काम चल रहा है। अब हर बड़े जिले में दो और छोटे जिलों में एक एक कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित हो जाएंगे।
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