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योगी मंत्रिपरिषद के विस्तार में बना क्षेत्रीय संतुलन

इस विस्तार में गोरखपुर क्षेत्र को खास तवज्जो देकर पूर्वांचल को साधने की कोशिश की गयी है। गोरखपुर क्षेत्र में सिद्धार्थनगर जिले के इटवा विधानसभा क्षेत्र से 2017 के चुनाव में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को पराजित करने वाले सतीश द्विवेदी को स्वतंत्र प्रभार का राज्यमंत्री बनाया गया है।

योगेश श्रीवास्तव
लखनऊ।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के पहले बहुप्रतीक्षित मंत्रिपरिषद विस्तार में क्षेत्रीय एवं जातीय संतुलन को साधने की भरपूर कोशिश की गयी है। इस विस्तार में जहां युवा चेहरों को खास तवज्जो दी गयी, वहीं वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव को भी ध्यान में रखते हुए योगी की नयी टीम तैयार की गयी है।

विधानसभा चुनाव के बाद 19 मार्च 2017 को जब प्रदेश में योगी सरकार का गठन हुआ था, उस वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा दो उप मुख्यमंत्री समेत 24 कैबिनेट मंत्रीए नौ स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और 13 राज्यमंत्रियों ने शपथ ली थी। उस समय मंत्रिपरिषद की संख्या 47 थी। चुनाव में भाजपा की झोली में अच्छी संख्या में सीटें डालने के बावजूद उस समय प्रदेश के कई क्षेत्र मंत्रिपरिषद में हिस्सेदारी पाने से वंचित हो गये थे। आज के विस्तार में इस संतुलन को बनाने की पूरी कोशिश की गयी।

आगरा, बदायूं और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों से भी मंत्री बनाकर लोगों को यह संदेश देने का प्रयास हुआ कि पार्टी को मजबूत बनाने वालों की अनदेखी नहीं की जायेगी।

मंत्रिपरिषद विस्तार में पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से कपिलदेव अग्रवाल और चरथावल से विधायक विजय कश्यप को जगह मिली तो पार्टी के प्रदेश महामंत्री और एमएलसी अशोक कटियार को भी मंत्री बनाया गया। कटियार भी पश्चिम उत्तर प्रदेश से आते हैं और गुर्जर समाज के हैं। इसी तरह बुलंदशहर से अनिल शर्माए आगरा से जीएस धर्मेश और फतेहपुर से विधायक चैधरी उदयभान सिंहए मैनपुरी से रामनरेश अग्निहोत्री को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। बुंदेलखंड से चित्रकूट के विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को राज्यमंत्री बनाया गया है। बदायूं संसदीय सीट भाजपा की झोली में डालने के कारण वहां के विधायक महेश गुप्त को भी मंत्री बनाकर उस क्षेत्र को इनाम दिया गया है।

इस विस्तार में गोरखपुर क्षेत्र को खास तवज्जो देकर पूर्वांचल को साधने की कोशिश की गयी है। गोरखपुर क्षेत्र में सिद्धार्थनगर जिले के इटवा विधानसभा क्षेत्र से 2017 के चुनाव में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को पराजित करने वाले सतीश द्विवेदी को स्वतंत्र प्रभार का राज्यमंत्री बनाया गया है। गोरखपुर क्षेत्र के ही बलिया सदर सीट से विधायक आनंद स्वरूप शुक्ल और संतकबीरनगर में घनघटा सीट से विधायक श्रीराम चैहान को भी मंत्री पद से नवाजा गया है। पूर्वांचल से वाराणसी उत्तरी से विधायक रवींद्र जायसवाल और मिर्जापुर के मडि़हान से रमाशंकर पटेल को भी मंत्रिपरिषद में जगह दी गयी है। वाराणसी दक्षिणी से डा0 नीलकंठ तिवारी पहले राज्यमंत्री थे। उनके परफारमेंस से खुश होकर मुख्यमंत्री ने इस फेरबदल में उन्हें स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बना दिया है।

इसी तरह कानपुर से मंत्री रहे सत्यदेव पचैरी के सांसद चुने जाने के बाद वहां की घाटमपुर सीट से विधायक कमला रानी वरुण को कैबिनेट मंत्री और कल्याणपुर सीट से विधायक नीलिमा कटियार को राज्यमंत्री बनाया गया है। योगी मंत्रिपरिषद के पहले विस्तार में 2022 के विधानसभा चुनाव मुख्य फोकस किया गया है। इसके चलते न केवल क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधा गया है बल्कि विस्तार से पहले ही चार मंत्रियों के इस्तीफे लेकर ये भी संदेश देने की कोशिश की गयी है सरकार साफ सुथरी छबि और अच्छे परिणाम देने वाले चेहरों को ही मंत्रिपरिषद में जगह देगी।जातीय संतुलन में वैश्य समुदाय के दो मंत्रियों राजेश अग्रवाल और अनुपमा जायसवाल के इस्तीफे के बाद इस समाज के तीन लोगों महेश चंद गुप्ता, कपिलदेव अग्रवाल और रवीन्द्र जायसवाल को मंत्रिपरिषद में जगह दी गयी है।

एक ब्राह्मण मंत्री अर्चना पाण्डेय के इस्तीफे के बाद इस समाज से छह लोगों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गयी है। ओमप्रकाश राजभर की बर्खास्तगी की भरपाई के लिये स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री अनिल राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। अब तक मंत्रिपरिषद में गुर्जर समाज का कोई सदस्य नहीं था। ऐसे में अशोक कटारिया को शपथ दिलाकर इस समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। पिछड़ों और दलितों को सबसे अधिक दस की संख्या में हिस्सेदारी दी गई है। तीन क्षत्रिय विधायक भी मंत्री बने हैं। साथ ही इस विस्तार में युवाओं को भी तवज्जो देने की पूरी कोशिश की गई है। आज शपथ लेने वाले अधिकतर मंत्री युवा हैं। इसके अलावा इसमें भाजपा और संघ की पृष्ठभूमि वालों को भी ज्यादा महत्व दिया गया है।

 

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